आज़ादी का मतलब
विचार
आज़ादी का मतलब
प्रीतीश नंदी
मैं आज़ाद भारत में पैदा हुआ था, और उसी आज़ादी के साथ बड़ा भी हुआ. इस बात के लिए मुझे माफ
करें यदि मैं 15/8 1947 तक हम पर शासन कर रहे अंग्रेजों के प्रति विशेष रूप से
शत्रुतापूर्ण नहीं हूं. आपको मुझे पाकिस्तानियों को उतनी नफरत नहीं करने के लिए भी
माफ करना चाहिए जितनी कि मुझसे उम्मीद की जाती है, क्योंकि मैंने जिन्ना की साजिशों
और गांधी की उदासीनता के चलते भारत के दो टुकड़े होते हुए नहीं देखा हैं, जैसा कि
दूसरे दावा करते हैं. मैं आज़ादी की संतान हूं. न कि उपनिवेशवाद की. और न ही भारत
के विभाजन की.
मेरे और मुझ जैसे करोड़ों भारतीयों के लिए, स्वतंत्रता ही सब कुछ है. हम खुद का
अधिकार जताते रहना चाहते हैं, तब भी जब हम गलत हो, और सत्य या भय से भी प्रभावित
नहीं होते हैं. इसीलिए हमने स्वतंत्रता का चयन किया. इसमें हमें भयभीत हुए बिना
बोलने का हक दिया. और यदा-कदा जब भारत के विभिन्न भागों में चुनाव होते हैं, तो हम
मतदाताओं के साहस और बुद्धिमत्ता से हैरान होते हैं. कोई सरकार, कोई राजनीतिक
पार्टी, कोई नेता कभी भी मतदाताओं के महत्व को कम आंकने के बाद अपना अस्तित्व बनाए
नहीं रख सका है. हमने चुनावों में हुए इंदिरा गांधी के अपमान को देखा है, भले ही वे
ही एकमात्र ऐसी हों जिसने देश के एकमात्र पूर्ण ताकत से लड़े युद्ध को जीता हो. और
वो इसीलिए हुआ क्योंकि उन्होंने हमारी स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए एक आपातकाल
हम पर थोपा. इसने उनकी विश्वसनीयता को खत्म कर दिया,. न सिर्फ कांग्रेस सत्ता से
बाहर फेंक दी गई बल्कि वे संसद में अपनी सीट भी राज नारायण नाम के एक बेवकूफ से हार
गई.
अपनी पूरी जिंदगी आजादी से जी लेने के बाद, आज मुझे इसे खतरे में देख कर आश्चर्य
होता है. नही, मैं तब विशेष रूप से आश्चर्यचकित नहीं होता, जब सरकार हमारी
स्वतंत्रता संक्षिप्त करने की कोशिश करती है. ये अपेक्षित है. ज्यादातर सरकारें हर
बहाने का इस्तेमाल करती है, भले ही वो राष्ट्रीय सुरक्षा हो या सामाजिक हित हो,
जिससे कि कोशिश कर हमारे अधिकारों पर अंकुश लगा सकें. आस्था, जाति, क्षेत्रीय
पहचान, विकास के लक्ष्य, ये सब ऐसे हथियार हैं जिन्हें राजनीतिज्ञ हमेशा भुनाते
रहते हैं. हम क्या हैं इस पर जोर राष्ट्र हमें क्या होते देखना चाहता है के बिल्कुल
विपरीत है. आज, सभी व्यवहारिक उद्देश्यों के लिए, हम सब सिर्फ एक पैन नंबर हैं
जिससे कि हर लेन – देन में ज्यादा से ज्यादा कर वसूला जा सके. जल्द ही हम में से हर
एक के पास एक यूआईडी नंबर होगा, हमारे फोन रिकार्ड किए जाएंगे, हमारी पसंद के बारे
में पूछताछ की जाएगी, हमारे ईमेल पढ़े जाएंगे, हमारी चैट पर नज़र रखी जाएगी, और
हमारे अधिकारों को खत्म कर दिया जाएगा. सर्वशक्तिमान राष्ट्र जिसे की गुंडों, ठगों
और छोटे चोरों के द्वारा चलाया जा रहा हैं, और ज्यादा प्रभावशाली हो जाएगा. भले ही
इसके कुछ सबसे प्रतापी साझेदार तिहाड़ में बंद हो और बाकियों के उपर संदेह या शंका
के बादल मंडरा रहे हों.
यह तथ्य से कि हमने उन जैसे लोगों को हमारे उपर शासन करने की अनुमति दे दी है
दूसरों को भी ऐसी रणनीति अपनाने का साहस देता है. अंडरवर्ल्ड दिन पर दिन धुंधला
होता जा रहा है और कानून बनाने वालों और कानून तोड़ने वालों के बीच की पतली सी डोर
गायब होती जा रही है. आज हर कोई एक ही तरफ है, मेरे और तुम्हारे खिलाफ. इसके बाद
भी, हर कट्टरपंथी समूह हमें भयभीत करना चाहते है, हमारी स्वतंत्रता का न्यूनीकरण
करना चाहता है, हमसे बलपूर्वक ऐंठना चाहता है. वे राज्य के जैसे ही तरीके अपना रहे
हैं, वैसे ही तर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं. वे हमें हुक्म देना चाहते हैं कि हम
क्या पहने, हम क्या खा और पी सकते हैं और किस तरीके से अपने अलग अलग ईश्वरों की
पूजा कर सकते हैं, हमैं कौन सी किताबें पढ़नी चाहिए, कौन सी फिल्में देखनी चाहिए,
किस कला की तारीफ करनी चाहिए और किस को बदनाम करना एवं तहस-नहस करना चाहिए.
|
15/8 एक अच्छा
समय है सोचने, विचरने और इस महान राष्ट्र के नागरिक होने के चलते अपने
अधिकारों के बारे में पता करने का. |
ये ही मुझे परेशान करता है. आप उन सरकारों को बदल सकते हैं जो आपकी निजी स्वतंत्रता
में हस्तक्षेप करती हैं. लेकिन आप कुछ लोगों के सोचने के तरीकों को बदल नहीं सकते
हैं. किताबों को जलाना, फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को सताना, लाइब्रेरियों और
कला विथिकाओं को तहस-नहस करना, बियर बारों को गैरकानूनी घोषित करना, जींस पहनने
वाली कॉलेज छात्राओं को पीटना, 25 साल से कम उम्र वालों के लिए शराब गैरकानूनी
करना, ऑनर किलिंग में बढ़ोत्तरी, लैंगिक अपराध, हिरासत में मौतें, और बेवकूफी भरे,
बेमतलब के बम विस्फोट जो कि निर्दोष लोगों को मार देते हैं, ये अलग अलग तरीके हैं
जिनसे हमारी स्वतंत्रता पर हमला होता है.
अब आप ज़ावेरी ब़ाजार में अपनी बाइक नहीं
रख सकते हैं. आप कोई भी मूवी या नाटक, तलाशी लिए जाए बिना नहीं देख सकते हैं. अब आप
जो चाहे वो पहन नहीं सकते हैं, क्योंकि कुछ विकृत लोगों को लगता है कि ये बलात्कार
करने को आमंत्रण देना है. आप अपने कर चुका कर आराम से रह नहीं सकते हैं, क्योंकि
सरकारी तंत्र ने निश्चय किया है कि हर कानून मानने वाले को संभावित कर चोरी करने
वाले के जैसे देखा जाए. जबकि असली बदमाश और अपराधी सत्तारूढ़ प्रणाली के भीतर ही
विराजमान है, इस ज्ञान में कि वे सत्ता की रक्षा में सुरक्षित है.
इसीलिए 15/8 एक अच्छा समय है सोचने, विचरने और इस महान राष्ट्र के नागरिक होने के
चलते अपने अधिकारों के बारे में पता करने का. हम किसी भी बाधा को दूर करने की ताकत
है, हर मुश्किल विपत्ति से लड़ाई कर सकते हैं अगर हम अपनी स्वतंत्रता को संजोए रखें
और उस पर अड़े रहें. मेरे लिए, उनकी अहमियत देशभक्ति से ज्यादा है, बहुत ज्यादा है.
चलिए हम मिलकर इसमें बढ़ोत्तरी करने का प्रयास करें.
15.08.2011, 10.45 (GMT+05:30) पर प्रकाशित