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यह मेरा नहीं, देश का आंदोलन है

मुद्दा

 

यह मेरा नहीं, देश का आंदोलन है

अन्ना हजारे


64 साल बीत गए हैं आजादी को लेकिन प्रश्न आज भी यही है कि क्या जनता को आजादी मिली है? 64 सालों बाद भी हालात वैसे ही हैं. भ्रष्टाचार वैसा ही है. जनता लुट रही है. फर्क सिर्फ यह हुआ है कि गोरे अंग्रेज चले गए हैं और काले आ गए हैं. परिवर्तन की लड़ाई को लेकर हमें ये सोचकर चलना है कि लोकपाल तो आकर रहेगा, लेकिन यह प्रश्न भी हमेशा गूंजता रहेगा कि क्या हम सही मायनों में आजाद हैं? क्या जो मौजूदा हालात हैं इन्हें हम आजादी मान ले.

मौजूदा हालात में व्यवस्था परिवर्तन बहुत जरूरी है. आपने देखा, हाल ही में पुणे में, किसानों का पानी बहा रहे थे. किसानों ने आंदोलन किया तो उन पर गोलियां चला दी. यह सही आजादी नहीं है. हमें परिवर्तन लाना ही होगा. सरकार सत्ता और पैसे के नशे में बेहोश हो गई है. हमें यह प्रश्न करना होगा कि हम इस देश और समाज को कहां लेकर जा रहे हैं. क्या सरकार ने कभी यह सोचा है कि हम जो विकास कर रहे हैं, वो शोषण करके कर रहे हैं? पेट्रोल, डीजल, कोयला यहां तक कि पानी को लेकर भी सरकार लोगों का शोषण कर रही है. क्या यही विकास है?

मैं तो पहले ही कई बार सरकार को कह चुका हूं कि कोई जरूरत नहीं है शहरों की ओर जाने की. गांव में ही हाथों को काम और पेट को रोटी मिल सकती है. लेकिन सरकार प्रकृति और मानवता का शोषण करने में अंधी हो गई है. सरकार आंखें बंद करके मानवता का शोषण कर रही है, प्रकृति का दोहन कर रही है.

आज पूरी दुनिया प्रकृति को लेकर चिंतित है. पेट्रोल खत्म होने वाला है, डीजल खत्म होने वाला है, यहां तक कि पानी भी खत्म होने वाला है, लेकिन हमारी सरकार इस बात को लेकर चिंतित नहीं है कि हमारी आने वाली नस्लों का क्या होगा? सरकार तो सिर्फ आंखें बंद करके शोषण कर रही है और पैसा लूट रही है. इसलिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी. तब तक, जब तक परिवर्तन नहीं होगा.

15 अगस्त को हमारे देश के पंथ प्रधान ने भी लाल किले पर भाषण देते हुए कहा कि हमने बिल संसद में भेजा है और जो करेगी संसद करेगी. मैं यह बात दोहरा रहा हूं कि हमें संसद पर पूरा भरोसा है और हमेशा रहेगा. लेकिन हमारी मांग यह है कि क्यों संसद में गलत बिल पेश किया जाता है?

हमने सभी बिंदू बेहद साफ किए थे, जैसे सीबीआई की स्थिति, लोकपाल की नियुक्ति और निलंबन आदि. सरकार हमें आश्वासन देती रही लेकिन अचानक जनता को धोखा देकर सरकार अपनी बातों से मुकर गई. मुझे आज बहुत अफसोस हुआ. मुझे हमेशा ही यह लगता था कि ऐसा ईमानदार व्यक्ति हमारे पंथ प्रधान है लेकिन मुझे आज यह कहते हुए अफसोस हो रहा है कि हमारा ईमानदार पंथ प्रधान कपिल सिब्बल के रिमोट से चल रहा है.

लोकपाल बन जाएगा इस बात में हमें कोई संदेह नहीं है. और यदि नहीं बनेगा तो जब तक शरीर में सांस है, हम लोकपाल के लिए लड़ते रहेंगे. देश हमारे साथ खड़ा है और हमारा हौसला बढ़ गया है. लोकपाल हम लाकर रहेंगे और परिवर्तन के लिए लड़ाई जारी रहेगी.

ये लोकतंत्र-लोकतंत्र चिल्ला रहे हैं. क्या हम लोकतंत्र को नहीं जानते? क्या देश इस बात को नहीं जानता कि इस सरकार के चार सांसद जेल में है और 150 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. मैं प्रश्न करता हूं कि क्या यह लोकतंत्र है? मैं विनती करूंगा देश से कि यह अन्ना का आंदोलन नहीं है. यह पूरे देश का आंदोलन है. हमें मिलकर अपने देश के बारे में सोचना चाहिए. ये जो लोकसभा है, ये लोकशाही का पवित्र मंदिर है. ऐसे पवित्र मंदिर में दागी लोग पहुंचेंगे तो यह मंदिर तो ध्वस्त हो जाएगा. लाखों लोग ने जो इस देश के निर्माण के लिए बलिदान दिया है, उसका क्या होगा ? मैं देश के लोगों से यह विनती करूंगा कि उस बलिदान का ध्यान रखें. सभी राजनीतिक पार्टियों को भी इस पवित्र मंदिर की शोभा का ख्याल रखना चाहिए.

क्या सरकार की नीति जो आज है वो जनहित में लगती है? मैं कहता हूं कि यह जनहित नहीं है बल्कि यह तो उद्योगपतियों के हित में हैं. बड़े-बडे उद्योगपतियों को जमीन देने के लिए गरीब और बेसहारा किसानों पर गोलियां चलाई जा रही है. ये किसानों की जमीन का सवाल हर राज्य में चल रहा है. हर राज्य के लोग कह रहे हैं कि इस जमीन के सवाल को लेकर लोकपाल के बाद आंदोलन होना चाहिए. सरकार किसानों के साथ जबरदस्ती कर रही है, गोलियां चला रही है, निर्दोष किसान मारे जा रहे हैं.

संसद सिर्फ दिल्ली में नहीं है, क्या हर राज्य की राजधानी में संसद नहीं है? और हर राज्य की राजधानी में ही क्यों क्या हर गांव के पास अपनी संसद नहीं है? गांव की संसद ने ही तो राज्य की और दिल्ली की संसद बनाई है तो फिर राज्यों और केंद्र की संसद में गांव की पंचायत की अहमियत क्यों नहीं है? हमें इसके बारे में आगे आंदोलन चलाना होगा. यदि इस देश की व्यवस्था बदलनी है तो इन सब मुद्दों पर सोचना जरूरी है. हमने अभी से इन मुद्दों पर सोचना शुरु कर दिया है.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Ishwar Dileep Bhase. [ishwarbhase@gmail.com] Sangurdi,Pune,Maharashtra . - 2011-08-20 08:06:47

 
  ये आंदोलन तभी खत्म होना चाहिये, जब जन लोकपाल बिल संसद में पास हो जाये और उसकी कार्रवाई हो. ये पूरे देश का आंदोलन है. इसलिये पूरे भारत के लोगों को अन्ना जी का साथ देना चाहिये. तभी हमारा देश महासत्ता बन सकता है. अन्ना हजारे जिंदाबाद. 
   
 

vipin bihari shandilya [vicharmimansa27@gmail.com] balaghat-madhyapradesh 2011-8-16 - 2011-08-16 13:24:55

 
  आधी आजादी के पूरे 64 साल बाद ये दूसरा गांधी आया है. अब लगता है कि हमें पूरी आज़ादी मुमकिन होगी. हमें गर्व है कि हम -अन्ना के लोग- हैं. बदलाव जरुर आएगा. हमारी-आपकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी. 
   
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