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मणिपुर में गृहयुद्ध का खतरा

राज्य

 

मणिपुर में गृहयुद्ध का खतरा

रविशंकर रवि गुवाहाटी से


उग्रवाद से लहुलूहान मणिपुर इन दिनों समय के सबसे बुरे दिन से गुजर रहा है. इस बार संकट उग्रवाद से नहीं, विभिन्न समुदायों के बीच बढ़ती रंजिश है. अलग जिले के गठन के सवाल पर कूकी और नगा समुदाय एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं. इसी सवाल पर पिछले करीब ढाई माह से जारी आर्थिक नाकेबंदी की वजह से मणिपुर घाटी के लोग पस्त हो चुके हैं. यदि कोई समाधान नहीं निकला तो मैतेई, कूकी और नगा समुदायों के बीच किसी भी वक्त हिंसा भड़क सकती हैऔर गृह युद्ध आरंभ हो सकता है. लेकिन केंद्र सरकार सोई हुई है और राज्य सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है.

मणिपुर नाकेबंदी


यदि पूर्वोत्तर राज्यों के लोग कहते हैं कि भारत सरकार को उनकी कोई चिंता नहीं है तो यह बात बहुत हद तक सही है. मणिपुर घाटी के लोग पिछले ढाई माह से जारी नाकेबंदी की वजह से पस्त हो गए हैं. वे अपने घर में ही नजरबंदी जैसी जिंदगी जीने को अभिशप्त हैं.

मणिपुर घाटी जाने के सभी रास्ते बंद हैं. वहां पर जरूरी चीजों का घोर अभाव हो गया है. पेट्रोल दो सौ रुपए प्रति लीटर और एलपीजी का एक सिलिंडर डेढ़ से दो हजार रुपए में बिक रहा है. जीने के लिए जरूरी अन्य सामानों की किल्लत हो गई है. बाहर से ट्रक वाले वहां जाने को तैयार नहीं हैं. जो ट्रक जाते हैं, उनका भाड़ा बेतहाशा बढ़ा दिया गया है. आम लोगों तक जरूरत के सामान पहुंचाने की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है. यदि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करने में विफल होती है तो केंद्र को हस्तक्षेप करना चाहिए. ढाई माह का समय कम नहीं होता है. लेकिन घाटी के लिए लोगों की परेशानियों से केंद्र सरकार अनजान बनी हुई है.

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक चैनलों को भी ऐसी खबरों में इसलिए दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि उनका टीआरपी ऐसी महत्वपूर्ण खबरों से नहीं बढ़ने वाला है. केंद्र के इस रुख से घाटी के लोगों, खासकर मैतेई समुदाय में यह धारणा बनने लगी है कि क्या वे भी इस देश के नागरिक हैं? यदि भारत सरकार उन्हें अपना नागरिक मानती तो इस तरह उन्हें उनकी हालत पर नहीं छोड़ देती.

मणिपुर घाटी के लोगों के साथ सबसे दिक्कत यह है कि देश के अन्य हिस्से से वहां तक पहुंचने के दोनों रास्ते नगा और कूकी बहुल इलाके से गुजरते हैं. उन दोनों समुदायों ने अपने-अपने राजनीतिक मतलब से आर्थिक नाकेबंदी लागू कर दी है. ये रास्ते घाटी के लोगों को शेष भारत से जोड़ते हैं. ये रास्ते बंद करके अक्सर घाटी के लोगों को ब्लैकमेल किया जाता रहा है.

पिछले वर्ष एनएसएसीएन नेता का मणिपुर में प्रवेश रोके जाने के विरोध में नगा संगठनों ने कोहिमा-इंफाल रोड पर आर्थिक नाकेबंदी लागू कर दी थी, जो लगभग एक माह तक चला था. तब सुरक्षाबलों की मदद से सिलचर-जिरिबाम रास्ते से ट्रकों को भेजा गया था. लेकिन इस बार कूकी संगठनों ने इंफाल की तरफ जाने वाले दोनों रास्तों पर पिछले एक अगस्त से आर्थिक नाकेबंदी लागू कर दी है. गुवाहाटी-डिमापुर होकर इंफाल जाने वाला मार्ग एनएच- 39 और सिलचर-जिरिबाम होकर इंफाल जाने का मार्ग एनएच-53 पर आर्थिक नाकेबंदी लागू होने से इंफाल जाने के सारे रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं.

कूकी संगठन नगा बहुल सेनापति जिले को विभाजित कर सदर हिल्स जिला के गठन की मांग कर रहे हैं. सदर हिल्स क्षेत्र एक कूकी बहुल सबडिविजन है. इस मांग के लिए कूकियों ने सदर हिल्स जिला मांग समिति का गठन कर लिया है और सारे आंदोलन इसी बैनर तले हो रहे हैं. नगा संगठन इस मांग का विरोध कर रहे हैं. जब मणिपुर सरकार ने नए जिले के गठन में दिलचस्पी लेना आरंभ कर दिया तो नाराज नगा संगठन नगा नेशनल काउंसिल ने कूकी बहुल इलाके में जाने वाले रास्ते पर भी आर्थिक नाकेबंदी लागू कर दी है. इससे स्थिति और विकट हो गई है.

हिंसा और उग्रवाद से जर्जर हो चुके मणिपुर में इस बार नागरिक युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है. हिंसा की एक चिंगारी जलते ही पूरा मणिपुर जल उठेगा. उसके बाद जो रक्तपात होगा, उस भयावह स्थिति की कल्पना नहीं की जा सकती है. क्योंकि उनके पास हथियारों की कोई कमी नहीं है और ऐसे मौके का लाभ उठाने के लिए उग्रवादी तैयार बैठे हैं.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

kaushalendra [] jagdalpur - 2011-10-23 08:27:34

 
  देश के पूर्वी भाग के प्रति भारत सरकार का व्यवहार सदा ही उपेक्षापूर्ण रहा है. राज्यसरकारें भी शेष राज्यों की तरह जनता के प्रति उदासीन हैं. यदि यही हाल रहा तो आने समय में गृहयुद्ध और अलगाववाद की समस्यायों से निपटना मुश्किल होगा.  
   
 

ashok kr roy [] guwahati - 2011-10-20 10:44:03

 
  Its really disheartening to learn about woes of Manipuri people.The writer has vividly pictured the pain and agony of the people and the ibobi govt. is totally insensitive to their basic problems. The UPA govt.is more concerned about their votes than solving the perenial problems of people of northeast. Thus they have no moral right to stay in power. As far as writer Ravi Shankar Ravi is concerned, Im his big fan. 
   
 

Ato Yepthomi [] Manipur - 2011-10-13 18:14:36

 
  I really appreciate the concern of the author. It is true that a civil war is on the anvil in Manipur and this is only because of the mis-rule of the Ibobi Singh-led Government, who is totally indifferent to the problems of the Nagas and the other communities. Before things aggravate beyond control, the UPA Government should impose President\'s Rule in Manipur. 
   
 

Sujeet Khanna [sujeet.khanna@gmail.com] New Delhi - 2011-10-13 05:05:55

 
  मणिपुर ही नहीं, सरकार ने कश्मीर में भी तो यही किया था. सरकारें केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकती रहती हैं और गंदगी फैलाती रहती हैं. मनमोहन सिंह जैसे नकारा पीएम देश ने इससे पहले कभी नहीं देखा था. इस सरकार को तो घोटाले से ही फुरसत नहीं है. भाजपा का भी वही हाल है. बाद में ये भाजपाई मणिपुर को लेकर भी गंदे तरीके से छाती ठोकेंगे- दूध मांगो तो खीर देंगे..... अडवाणी जी की तो ऐसे मुद्दों पर बोलती ही बंद रहती है. 
   
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