पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

बीटी कॉटन के चक्रव्यूह से निकलना जरूरी

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

बीटी कॉटन के चक्रव्यूह से निकलना जरूरी

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >मुद्दा >मध्यप्रदेश Print | Share This  

मैं गरीब हूं

मुद्दा

 

मैं गरीब हूं

प्रशांत कुमार दुबे भोपाल से

मैं गरीब हूं


विश्व की जानी मानी पत्रिका फोब्स जब विश्व के चुनिंदा अमीरों की सूची जारी करती है तो उस सूची में शामिल होने वाले रसूखदारों की छाती और चौड़ी हो जाती है. हर अमीर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका नाम फोब्स की सूची में आये . इससे उस व्यक्ति के नाम के आगे एक तमगा और जुड़ जाता है. यह उसके लिये तो बडे़ ही सम्मान की बात है. लेकिन इसके ठीक उलट किसी गरीब को, गरीब बताना ना केवल असम्मानजनक है बल्कि गैर संवैधानिक भी है. उसकी गरीबी का सार्वजनिक होना या किया जाना भी प्रत्यक्ष रुप से उसकी गरीबी के साथ किया जाने वाला भद्दा मजाक से बढकर कुछ नहीं. लेकिन मध्यप्रदेश का खंडवा जिला प्रशासन गरीबों के साथ यह भद्दा मजाक कर रहा है. खंडवा जिले में राज्य सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों के घरों के सामने लिखवा दिया है- मैं गरीब हूं.

खंडवा जिले के खालवा ब्लॉक के डाभिया गांव के राजाराम पलायन पर बाहर गांव (दूसरे जिले में) गये थे, जब लौटकर आये तो उन्होंने अपने घर की दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा पाया- मैं गरीब हूं. वे उसे देखकर कुछ समझ नहीं पाये. सुबह उठकर उन्होंने देखा तो केवल उनका ही घर नहीं बल्कि आसपास के कई घरों में इस तरह से ही लिखा गया था. राजाराम को माजरा समझ नहीं आया. राजाराम ने पंचायत सचिव से यह पूछा तो उन्होंने बताया कि ऐसे लोग जो गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं, उनके घरों के सामने राज्य सरकार के आदेश से यह लिखा जायेगा.

यह काम क्यों शुरु किया गया, इस पर खालवा जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.के.शुक्ला कहते हैं कि गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की पहचान में दिक्कत ना हो और यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से इस व्यवस्था का लाभ ले रहा हो तो वह सामने आयेगा. इस योजना का मूल भाव तो समझ में आता है लेकिन उसके लिये और तरीके उपयोग में लाये जाने चाहिये, ना कि किसी को भी असम्मानजनक तरीके से उसके घर के सामने ’’मैं गरीब हूं‘‘ लिखकर उसे अपमानित करने के. इस सवाल पर श्री शुक्ला कन्नी काटते हुये नजर आये. उन्होंने कहा कि आप तो इस विषय पर वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर लीजिये. मैं मीटिंग में हूं, यह कहकर उन्होंने फोन काट दिया.

डाभिया पंचायत के सचिव माखन बताते हैं कि लगभग 1 वर्ष पूर्व उनके पास जनपद पंचायत से लिखित आदेश आया था कि वर्ष 02-03 के सर्वे के आधार पर जारी की गई गरीबी रेखा की सूची के आधार पर गांव के प्रत्येक गरीब परिवार के घरों के सामने की दीवार पर ’’मैं गरीब हूं‘‘ लिखवा दिया जाये. इस पत्र के साथ उसका प्रोफॉर्मा भी था. आदेश था तो लिखवा दिया हमने. अब अच्छा लगे या बुरा, लिखना तो पड़ेगा ही. ऊपर से आदेश है. फिर यह केवल हमारी पंचायत में नहीं है बल्कि पूरे विकासखंड में है. आसपास के गांव दगड़कोट, लमोठी, पीपरी आदि गांवों में भी यह लिखा पाया गया.

जिले के कलेक्टर कवींद्र कियावत कहते हैं कि नाम तो पुराने ही लिखे हैं, कोई नया नाम नहीं लिखा है. उन घरों में पुताई नहीं हुई होगी. इस तरह की नई प्रक्रिया नहीं चल रही है. यदि यह नया नहीं चल रहा है तो फिर उसे पुतवाया क्यों नहीं गया तब तक फोन कट गया.

इस मामले में यह गौरतलब है कि पंचायतों को नाम ना लिखे जाने के संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है. तभी तो डाभिया के सचिव माखन कहते हैं कि अभी कुछ नये नाम जुड़े हैं, उनके घरों के सामने भी यह लिखा जाना है. राशि अभी किसी मद में नहीं है, जिसके कारण देर हो रही है. उनसे यह पूछे जाने पर कि क्या अभी यह नाम नहीं लिखे जाने को कोई आदेश आपके पास आया है ? उनका जवाब था- “लिखने का आया था. ना तो मिटाने का आया, ना ही रोकने का.”
आगे पढ़ें

Pages:
 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Rajiv [pikkybabu@gmail.com] Giridih, Jharkhand - 2012-09-09 18:20:25

 
  गरीबों के धन से अमीर हुए मंत्री और नौकरशाह, गरीबों का ही मज़ाक उड़ा रहे हैं.  
   
 

Rajiv [pikkybabu@gmail.com] Giridih, Jharkhand - 2012-09-08 18:24:31

 
  गरीबों का धन लूट कर अमीर बने मंत्री और नौकरशाह तो अब ऐसा लिखेंगे ही. एक शेर याद आता है, एक शहंशाह ने बनवा के हंसी ताजमहल, हम गरीबों का उड़ाया है मज़ाक. इसी तरह, एक सरकार ने लिखवा के कि मैं गरीब हूं, हम गरीबों का उड़ाया है मज़ाक. 
   
 

Dilip sikarwar [dsikarwar71@gmail.com] bhopal - 2012-08-21 11:17:35

 
  प्यारे प्रशांतजी, आपने सही मुद्दा चुना है लिखने के लिए, लेकिन इससे किसी के कानों जू रेंगी हो तो बताइएगा. 
   
 

arvindpant [arvindpant000@gmail.com] joshimath uttrakhand - 2012-07-09 11:13:51

 
  शर्मनाक... बेहद शर्मनाक कृत्य है नौकरशाहों का... 
   
 

DATARAM [dattaram@aai.aero] Jodhpur - 2012-07-07 11:15:51

 
  जब इस तरह के नियम बनाए जा रहे हैं तो भ्रष्टाचारियों के लिए भी ऐसा कानून बनना चाहिए. भ्रष्टाचरी के घर पर भी लिखना चाहिए - मैं भ्रष्टाचारी हूं. 
   
 

shailesh [] Bangalore - 2012-07-06 18:06:44

 
  this is shameless. Administrative authority should think about this issue. they are on higher position in district. they should also use their mind and understanding. if they are unable to take proper decision, they should leave their chair. it also shows that commission is unable to select proper person in Department.
second, panchayat can go beyond the the adminitrative power or they should go. but somehow public is also responsible for such kind of issues if coming in society. They should go for the right candidate in election for fare work.

shailesh,
Bangalore
 
   
 

Ramji Sharan Rai [ramjiswadesh@gmail.com] Datia (M.P.) - 2012-07-05 06:21:22

 
  साथियों जिंदाबाद. ये रणनीति उन नकली गरीबों को सबक सिखाने के लिए ठीक है जो लखपति होने के बावजूद बीपीएल का लाभ ले रहे हैं लेकिन वास्तविक गरीब के घर के सामने लिखना ठीक नहीं है. क्यों उनकी गरीबी का मज़ाक बनाया जा रहा है, जरा सोचें. 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in