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विदेशों में बैन, भारत में चैन

दवा का दावा

 

विदेशों में बैन, भारत में चैन

जे के कर


भारत में Nimesulide एक ऐसी दवा है, जो हर गली-मुहल्ले में धड़ल्ले से बिकती है और आम लोग इसका उपयोग करते हैं. आमतौर पर Nimesulide बुखार तथा दर्द में दी जाने वाली दवा है, जिसे सबसे पहले अमरीका के 3M Pharmaceuticals ने बनाया था. लेकिन इस दवा को अमरीका में बेचने की अनुमति नहीं मिली. इस दवा में यकृत के खराब होने की आशंका बनी रहती है और बच्चों में उससे भी कहीं अधिक दुष्प्रभाव पड़ता है, इसलिये 3M फर्मा को इसे अमरीका ने अपने यहां बेचने की अनुमति नहीं दी.

दवा मुनाफे के लिये

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पहले मुनाफा, फिर मरीज

 
जब अमरीका में इस दवा को अनुमति नहीं मिली तो इसे स्विटजरलैंड की दवा कंपनी Helsinn को बेच दिया गया. यह जानना दिलचस्प है कि इस दवा कंपनी को भी स्विटजरलैंड में इस दवा को बेचने/उपयोग करने की अनुमति नहीं मिली. फिर इसे Boehringer नामक कंपनी को बेच दिया गया, जिसने 1985 में इटली में इससे संबंधित प्रयोग किये. किसी तरह इस दवा को स्विटजरलैंड में अनुमति इस शर्त के साथ मिली कि यह दवा किसी भी परिस्थिति में बच्चों के लिये उपयोग में नहीं लाई जाएगी.

इस दवा के दुष्प्रभाव का अंदाज आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसे आज भी अमरीका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा में बेचने की इजाजत नहीं है. यहां तक कि भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश औऱ पाकिस्तान में भी इस दवा पर प्रतिबंध है. हाल ये है कि 6 बार आवेदन के बाद भी श्रीलंका सरकार ने Nimesulide दवा को अपने यहां प्रवेश की अनुमति नहीं दी. लेकिन दुनिया भर में इस प्रतिबंधित यानी बैन दवा को भारत में बड़े चैन से बेचा जा रहा है.

Nimesulide दवा का जो ब्रांड सबसे अधिक चलन में है, वह NISE नाम से बाज़ार में उपलब्ध है. इसे डाक्टर रेड्डीज़ लि. नामक भारतीय दवा कंपनी बनाती है. इस दवा को भारत में बेचने की अनुमति कैसे मिली, यह जानना भी अपने आप में दिलचस्प है.

भारत में किसी भी नई दवा को बेचने के लिये ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया से अनुमति लेनी पड़ती है. अनुमति के लिये भारत में पशुओं और मनुष्यों पर किये गये प्रयोग और उन पर होने वाले प्रभाव की रिपोर्ट देनी पड़ती है. लेकिन Nimesulide के मामले में न्यूजीलैंड की एक कंपनी Adis International Ltd. द्वारा किये गये परीक्षण रिपोर्ट को जमा करा दिया गया और उसे स्वीकार भी कर लिया गया. चौंकाने वाली बात ये है कि Nimesulide न्यूजीलैंड में ही प्रतिबंधित है.

Nimesulide को पहले पहल 1995 में भारतीय दवा बाज़ार में उतारा गया. इसमें बच्चों के लिये सीरप भी शामिल था. इसे बाज़ार प्रबंधन की कुशलता ही कहेंगे कि दुनिया भर में प्रतिबंधित यह दवा भारत में कुछ ही समय के भीतर 300 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली दवा बन गई.

लेकिन लाख टके का सवाल यही है कि आखिर जब देश में पहले से ही बुखार के लिये Paracetamol जैसी दवाइयों के विकल्प उपलब्ध थे तो फिर किन कारणों से इस प्रतिबंधित दवा को भारत में प्रवेश की अनुमति मिली ? इसका जवाब बहुत सीधा है कि Nimesulide, दवा कंपनियों के लिये मुनाफेदार उत्पाद है और भारतीय कानून के चोर दरवाजे ऐसे मुनाफे के लिये ही तो बने हैं !

कई बार Nimesulide के पक्षधर यह सवाल उठाते हैं कि अगर Nimesulide इतनी खतरनाक है तो इसके दुष्प्रभाव तो अब तक भारत में नजर आने चाहिये थे. लेकिन बहुत भोलेपन से इस तरह के सवाल उठाने वाले यह बात बेहतर तरीके से जानते हैं कि भारत में अधिकांश मामलों में मरीजों के मर्ज और इलाज का कोई ब्यौरा नहीं रखा जाता. कोई मरीज बुखार आने पर एक चिकित्सक के पास जाता है तो खांसी की शिकायत होने पर किसी दूसरे चिकित्सक के पास. भारतीय मरीज आमतौर पर अपने इलाज की पर्चियों को भी संभाल कर नहीं रखता. ऐसे में अगर किसी मरीज का यकृत काम करना बंद कर दे तो उसे Nimesulide से जोड़ कर, उसके अध्ययन का कोई तरीका हमारे पास नहीं है. ऐसे में भला Nimesulide की गड़बड़ियों की जांच ही कहां संभव है ?

हालांकि Nimesulide को लेकर होने वाले विरोध के बाद पिछले साल 10 मार्च को भारत सरकार ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिये Nimesulide को प्रतिबंधित कर दिया है. लेकिन सवाल बड़े लोगों के लिये भी Nimesulide के सेवन का है. क्या सरकार इस बात की प्रतीक्षा कर रही है कि देश की एक बड़ी आबादी का यकृत खराब हो जाये, उसके बाद आंकड़ों का हवाला देते हुये Nimesulide पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाये ? जाहिर है, सरकार के हिस्से में फिलहाल मौन है और Nimesulide बेचने वाली कंपनियां चैन की बांसुरी बजाती हुई इस दवा को पूरे देश को खिलाने में जुटी हुई हैं.

09.07.2012, 18.50 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Robinsh Kumar [robinsh123@gmail.com] www.blogbaba.com - 2012-07-12 02:43:45

 
  अरे तो साहेब ये भारत है ना जहाँ हर व्यक्ति भ्रष्ट से भी बढ़ कर महान इंसान है और यहाँ सरकार में भी वैसे लोग ही बने हुए हैं तो ऐसी खबर का भी कोई मतलब नहीं बनता जिसे एक नामी अखबार ने भी छापना बेहतर समझा ।

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