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गुवाहाटी कांड के सवाल

बात निकलेगी तो

 

गुवाहाटी कांड के सवाल

विनोद रिंगानिया गुवाहाटी से


घटना सोमवार रात की थी. सभी अखबार छप चुके थे, चैनलों का प्राइम टाइम खत्म हो चुका था इसलिए कोई खास नोटिस नहीं लिया गया. बुधवार के स्थानीय अखबारों में घटना के बारे में छपा, कोई खास नोटिस नहीं लिया गया. शुक्रवार तक घटना के वीडियो क्लिपिंग्स यू ट्यूब पर आ गए और सारा देश जैसे अचानक नींद से जागा. अमिताभ से लेकर सोनिया तक सबने घटना पर थू-थू की.


पुलिस ने बुधवार से ही कार्रवाई शुरू कर दी थी. एक के बाद एक आरोपियों को पकड़ने का सिलसिला शुरू हो गया था और शुक्रवार तक चार आरोपी पुलिस की गिरफ्त में थे. लेकिन वह युवक अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जो बढ़-चढ़कर घटना के वक्त बोल रहा था, यहां तक कि उसने मीडिया को बाइट्स भी दिए. कहीं छपा है कि उसे बचाने में युवक कांग्रेस के एक नेता का हाथ है. सबसे शर्मनाक बात है इस घटना में एक पत्रकार का हाथ होना, जिसने आरोपों के अनुसार सारी घटना की साजिश रची.

मीडिया की थू-थू
जब सारे देश के लोग इस बात पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे थे कि आखिर जीएस रोड कांड के घटनास्थल पर एक टीवी चैनल की टीम इतनी जल्दी कैसे पहुंच गई, उन लोगों ने लड़की को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की और उस टीवी टीम का सारा प्रयास लड़की का चेहरा दिखाने पर केंद्रित क्यों था, तब उस टीवी कैमरा टीम का वह संवाददाता मन ही मन देश भर के लोगों की मूर्खता पर हंस रहा होगा. क्योंकि सारा कांड तो उसी संवाददाता के कारण घटित हुआ, इसलिए उस पत्रकार से लड़की को बचाने की उम्मीद करना सरासर बेवकूफी नहीं तो और क्या है.

अन्ना टीम के सदस्य अखिल गोगोई ने शनिवार को मीडिया के सामने जो फुटेज दिखाए, उसमें जो आवाजें आ रही थीं- उन्हें देखने-सुनने के बाद इस बात में संदेह नहीं रह जाता कि इस कांड को शुरू करने में तरुण गोगोई सरकार के एक मंत्री द्वारा चलाए जा रहे चैनल के संवाददाता का ही हाथ था. उक्त संवाददाता द्वारा कहे गए गंदे शब्दों को यहां उद्धृत करना संभव नहीं है.

उस संवाददाता को सरकार गिरफ्तार करती है या बहानेबाजियां करती है, इस पर बहुत हद तक मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बयानों की विश्वसनीयता निर्भर करेगी.

हमने वृहस्पतिवार को ही अपने अखबार दैनिक पूर्वोदय के अंक में इस बात को लेकर शंका व्यक्त की थी कि आखिर कैमरामैन बदमाशों के चेहरों को कैमरे में कैद करने की बजाए लड़की के चेहरे का फुटेज लेने को इतना लालायित क्यों था? हमने सोचा था कि ऐसा कैमरामैनों के गलत प्रशिक्षण के कारण हुआ होगा.

हम वृहस्पतिवार के अपने अखबार पूर्वोदय के संपादकीय लेख की कुछ पंक्तियां यहां उद्धृत कर रहे हैं- ""इलेक्ट्रानिक मीडिया या प्रिंट मीडिया के जो फोटोग्राफर हैं, उनकी प्रवृत्ति वैसे लोगों की तस्वीर लेने की होती है, जो अपना चेहरा छुपाना चाहते हैं, यह व्यक्ति के प्राइवेसी या निजत्व के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है. यदि कोई व्यक्ति अपनी तस्वीर लिए जाने की अनुमति नहीं देता है तो आप उसकी तस्वीर नहीं ले सकते. लेकिन मीडिया ऐसे व्यक्तियों के फोटोग्राफ लेने के लिए अतिरिक्त मेहनत करने को अपने पेशे का एक हिस्सा समझता है.''

अखिल गोगोई द्वारा किए गए रहस्योद्घाटन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि क्यों भीड़ में शामिल शोहदे लड़की के चेहरे पर से बाल हटाने का प्रयास कर रहे थे और कैमरामेन उसके चेहरे को कैमरे में कैद करने के लिए अतिरिक्त मेहनत कर रहा था. सोमवार की घटना ने पीपली लाइव में किए गए व्यंग्य को काफी पीछे छोड़ दिया है और एक संवाददाता के जघन्य अपराध की यह घटना इलेक्ट्रानिक मीडिया के इतिहास में हमेशा शर्म के साथ याद की जाएगी.

शोर के बाद की चुप्पी
इस घटना पर जिस तरह देशभर में थू-थू हो रही है, उससे एक उम्मीद बंधती है. बड़े-बड़े लोग- महिला आयोग की अध्यक्ष, साधारण लोग- इंटरनेट पर टिप्पणियां करने वाले- सभी कह रहे हैं कि सोमवार की रात के दरिंदों को फांसी देनी चाहिए, उम्र कैद होनी चाहिए, नंगा करके उल्टा लटका देना चाहिए.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

kumar [] visakhapatnam - 2012-12-10 02:26:16

 
  open there clothes and run them on same road all TV cover that news live. 
   
 

नागेन्द्र शर्मा [nagendra.ghy@gmail.com] गुवाहाटी - 2012-07-14 23:47:27

 
  रिंगानिया जी ने गुवाहाटी मे एक लड़की के साथ की गई बददसलूकी की खबर के साथ follow up के रुप मे इस तरह की घटनाओं के साथ जुड़े सवालों को उठा कर एक सफल और दक्ष पत्रकार होने का परिचय दिया है। किसी शर्मनाक घटना के घटित होने के बाद जांच आयोग बैठाना और आयोग की रिपोर्ट को विधान सभा के पटल पर रखा जाना तथा उसके बाद सारे मामले को सीबीआई के सुपुर्द करना आजकल परम्परा सी बन गई है। यह परम्परा घटनाओं पर पर्दा डालने की प्रक्रिया के अतिरिक्त कुछ नहीं। उल्लेखित घटना मे एक मंत्री की टीवी चैनेल के एक पत्रकार के शामिल होने की बात की गई है। यदि ऐसा है तो वह मंत्री तो बिना कोई जांच आयोग बैठाए ही पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। पर वह करेगा नहीं क्योंकि वह पत्रकार भी शायद पोषित पत्रकार होगा और वह पत्रकार भी मंत्री के कई राज जानता होगा।
रिंगानिया जी ने इस घटना को प्रकाशित कर सारे राष्ट्र को बतला दिया कि असम की राजधानी गुवाहाटी नगर एक आपराधिक नगर बनता जा रहा है।
 
   
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