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आयोडीन नमक का जहर यानी थायरायड?

बहस

 

आयोडीन नमक का जहर यानी थायरायड?

जे के कर बिलासपुर छत्तीसगढ़ से

आयोडीन नमक थायरायड


इसी साल जनवरी की एक दोपहर मैं भोजन करने के बाद धूप का आनंद ले रहा था. तभी मुझे थायरो केयर बिलासपुर से मेरी ब्लड रिपोर्ट मिली. मेरे शरीर में थायरायड इस्टुमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) की मात्रा सामान्य से अधिक थी. सामान्य रूप से इसे 0.30-5.5 के बीच होना चाहिए, जबकि मेरे रक्त में इसकी मात्रा 6.86 पाई गई. यह तय था कि अब मुझे भी हाईपो थायराडिस की दवा लेनी पड़ेगी. शाम को जब मैं अपनी पारिवारिक फीजिशियन डा.सरोज तिवारी से मिला, तो उन्होंने मुझे प्रतिदिन थाइरोक्स-50 (THYROX-50) की एक गोली सुबह खाली पेट में लेने की सलाह दी.

अपने परिवार के कुछ सदस्यों के थायराडिसम से ग्रस्त होने के कारण मैं जानता हूं कि इस बीमारी के कारण थकावट, ठंड लगना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, कमजोर याददाशत, वजन का बढ़ना, कर्कश स्वर, रक्तचाप का बढ़ना जैसे तकलीफें होती हैं. इस बीमारी में शरीर में सूजन, ह्रदय की धड़कन का कम होना तथा मुंह की सूजन भी होती है, इसे केवल दवा (levothyroxine) से ही नियंत्रण में रखा जा सकता है, जो जीवनपर्यंत लेनी पड़ती है.

अपने खून की जांच के बाद मैंने अपने परिचित सुनील तिवारी से संपर्क किया. सुनील एक भारतीय दवा कंपनी मैक्लायड में छत्तीसगढ़ के दवा प्रतिनिधि हैं तथा थाइरोक्स इसी दवा कंपनी का उत्पाद है. सुनील ने मुझे बताया कि जब वह 2005 में पहली बार बिलासपुर शहर में आया था, तब औसतन प्रतिमाह बीस हजार रुपये की थाइरोक्स बिक जाती थी, जो अब औसतन प्रतिमाह एक लाख सत्तर हजार रुपये की बिक जाती है. यानी पिछले सात वर्षों में इसकी बिक्री आश्चर्यजनक रूप से बढ़ी है. उसका कहना है कि आजकल लोगों में बीमारी के प्रति जागरुकता बढ़ी है और अब बिलासपुर शहर में ही थाइराइड के टेस्ट हो जाते हैं. हालांकि इस बीमारी के बढ़ने की वजह सुनील नहीं बता सका.

इसके बाद मैंने एक पैथोलॉजी लैब में कार्यरत बंटी ऊर्फ तेज साहू से मुलाकात की. बंटी हमारे पारिवारिक फीजिशियन के यहां मरीजों से अपने पैथोलैब के लिए सैंपल एकत्र करता है. बंटी ने बताया कि आज से 10 साल पहले तक महीने में दो या तीन हाइपो थायराडिसम के मरीज मिलते थे, जबकि अब हर महीने 10 से ज्यादा मरीज मिलते हैं.

थायरोकेयर मुंबई की प्रतिष्ठित पैथोलैब है, जहां भारत में सबसे अधिक थायराइड हार्मोन का परीक्षण किया जाता है. बिलासपुर में थायरोकेयर के संचालक शेख असलम के अनुसार 2004 में जब उन्होंने अपना सैंपल कलेक्शन सेंटर स्थापित किया, तो उस वक्त जितने सैंपल लिए जाते थे, उसमें से 20 प्रतिशत नमूनों में हाइपो थायराडिसम निकलता था, लेकिन आज जितने नमूने लिए जाते हैं, उनमें कम से कम 80 फीसदी हाइपो थायराडिसम के मामले सामने आ रहे हैं. असलम कहते हैं, “बिलासपुर जैसे शहर में डायबिटीज और हाइपो थायराडिसम महामारी का रूप लेते जा रहे हैं.''

नगर के प्रतिष्ठित फीजिशियन डॉक्टर संदीप गुप्ता बताते हैं कि वे पिछले 25 सालों से बिलासपुर में प्रैक्टिस कर रहे हैं. पहले महीने में कभी-कभार ही हाइपो थायराडिसम के एक-दो मरीज मिलते थे. लेकिन अब हालत ये हैं कि हर महीने 10 नए मरीज सामने आते हैं.

बिलासपुर के सर्वाधिक व्यस्त सदर बाजार के इलाके में स्थित परवेज मेडिकल के संचालक के आंकड़े भी मिलते जुलते हैं. वे बड़ी साफगोई से बताते हैं, “दस साल पहले तक उनके यहां औसतन महीने में हाइपो थायराडिसम का कोई एकाध मरीज दवाई के लिए यहां आता था, लेकिन आज हर रोज हाइपो थायराडिसम की दवा लेने वाले मरीज हमारे यहां आता हैं. हमारी बातचीत के बीच ही एक अधेड़ महिला एल्ट्रोक्सिन(ELTROXIN) की खाली शीशी लेकर आ गई. उसे हाइपो थायराडिसम की यह दवा चाहिए थी.

महिलाओं में जिस तेजी के साथ हाइपो थायराडिसम फैला है, यह उसका एक नमूना था. शहर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुपर्णा मित्रा 2003 में यहां आई थीं और तोरवा इलाके में उनका नर्सिंग होम है. डॉक्टर मित्रा बताती हैं, 'पहले यदा-कदा ही इस मर्ज से ग्रस्त लोग आते थे. लेकिन अब हालत ये है कि मेरे पास आने वाले कई मरीज पहले से ही एल्ट्रोक्सिन या थाइरोक्स ले रहे होते हैं. मैं प्रत्येक गर्भवती तथा रक्त अल्पता के मरीज को टीएसएच परीक्षण की सलाह देती हूं और टीएसएच बढ़े होने की स्थिति में, मैं उन्हें फीजिशियन के पास भेज देती हूं. आजकल हाइपो थायराडिसम के आंकड़े में बेतहाशा वृद्धि हुई है, लेकिन मैं आपको उनसे संबंधित आंकड़े नहीं दे सकती.'

शहर के सदर बाजार इलाके में जगत मेडिकल हॉल के संचालक अनूप छाबड़ा बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में हाइपो थायराडिसम की दवाओं के कई नए ब्रांड बाजार में आ गए हैं. वे बताते हैं, पहले एल्ट्रोक्सिन या थाइरोक्स जैसी दवाएं ही यहां चलन में थीं. लेकिन अब थाइरोनोर्म (THYRONORM) भी बाज़ार में उपलब्ध है. अब तो ल्यूपिन (LUPIN) और इन्टास (INTAS) भी प्रतिस्पर्धा में उतर गई हैं. वे कहते हैं, “इतने ब्रांडों का बाज़ार में आना बताता है कि यह बीमारी तेजी से पैर पसारती जा रही है.” छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की कुल आबादी 1991 में 16,94,883 थी, जो 2001 की जनगणना में 18 प्रतिशत बढ़कर 19,98,353 हो गई. इसके बाद 2011 की जनगणना में 26,62,077 हो गई. यानी पिछले दस सालों में वृद्धि दर 33 प्रतिशत रही.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

ravg jangra [] kurksatera - 2016-10-19 18:01:46

 
  बैन पाक कलाकार बैन पाक कलाकार बैन पाक कलाकार करे लेकिन करन और पैसा लगाने वालो को नूकसान का मूआवजा सरकार या m n s दे
ना मिले तो zee zindgi को भी बे करे
m n s बिजेपी के राजयभा के Dr. Subash caindra का और b j p के सभी Businessman दोस्तो का भी वीरोध जो पाक नाटक व पाक के साथ अभी तक Business कर रहे ह
 
   
 

ashok [ashokktiwari@yahoo.com] bhopal - 2014-09-24 12:32:34

 
  हवा और पानी की तरह नमक इंसान की मूलभूत आवश्यकता है | सिर्फ आयोडीन युक्त नमक बेचने का कोई कानून नहीं है ये सिर्फ एक सरकारी आदेश के तहत किया जा रहा है , उक्त आदेश को सरकार कभी भी निरस्त कर सकती है . भारत से जादा गोइटर की समस्या विश्व के अनेक देशों में हैं , जिन देशों में goitre रोग भारत से जादा है वहां भी सिर्फ आयोडीन युक्त नमक का कोई कानून या आदेश नहीं .
७० पैसे किलो का नमक १७ रूपये में बेचा जा रहा है इससे १०००० करोड़ का अतिरिक्त मुनाफा होता है | यह मुनाफा किन लोगों की जेबों में जा रहा है ?
नमक में आयोडीन मिलाने के लिए पोटेशियम आयोडाइन मिलाना चाहिए जबकि भारत में सस्ता पोटेशियम आयोडेट मिलाते हैं , इसकी लाइफ कुछ दिनों की होती है , यह कपूर की तरह वोलेटाइल होता है | अर्थात फैक्ट्री से नमक का पैकेट हमारे घर आते आते पोटेशियम आयोडेट उड़ जाता है .
 
   
 

rakesh [] jabalpur - 2012-10-20 17:09:05

 
  मुझे लगता है लेखक को जान का खतरा हो सकता है क्योंकि हम अपने देश में अपनी मरजी से सांस नहीं ले सकते और न दर्द किसी को बता सकते हैं क्योंकि सभी बिके हुए हैं. प्रधानमंत्री और सरकार भी खरीददार हैं कंपनियां जिनके आगे कोई नहीं.  
   
 

mayakaul [kaul3maya@gmail.com] Bpopal M.P. - 2012-10-14 14:44:07

 
  अभी भी जाग जाओ देशवासियों उपवास वाला नमक यानी सेंधा नमक उपयोग में लाएं. ये धीमा जहर हम सबको पीढ़ियों तक बीमार कर देगा. 
   
 

kusum [] ghaziabad - 2012-10-07 03:29:32

 
  बाजारवाद का घिनौना सच है ये. 
   
 

N.K.Verma [nkvnewdelhi@yahoo.co.in] Churu (Rajasthan) - 2012-10-05 12:10:10

 
  लेख बहुत ही जगानेवाला है लेकिन सरकार और जनता जागे तब ना. जनता को बिना आयोडीन वाला नमक बाजार में मिलता ही नहीं बहुत कोशिश करने पर ही मिलता है क्या करे जनता सरकार को रोए या डॉक्टर को. बेचारी जनता. 
   
 

अमृत खरे [] लखनऊ ,उत्तर -प्रदेश - 2012-10-02 04:17:30

 
  लेख तथ्यपरक है|आयोडीन-युक्त नमक कि अंधाधुन्द बिक्री और सेवन से थाइरोइड कि बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया है|लेख में बीमार हो गए लोगों के लिए सलाह भी दी जानी चाहिए थी|आखिर अब लोग क्या करें? 
   
 

DR. Vijay [] Bilaspur, C.G. - 2012-10-02 02:13:59

 
  This is really a issue for concern. The writer has convinced me that use of iodized salt indiscriminately can cause problems. There should be available in the market both `iodized` and plain salt for use. Compulsory use of iodized salt should be discontinued. If possible there should be screening for people who NEED iodized salt.  
   
 

balbir singh [balbir.deys@gmail.com] mobile - 2012-10-01 08:12:32

 
  well written statement. 
   
 

surya [] chicago,USA - 2012-10-01 05:20:13

 
  Good Job JK. Hope we all awake and make goverment and people act rapiodly and responsibly. can Amir take these issue on Satyamev Jayate. 
   
 

वीजय झा [] दिल्ली - 2012-09-28 06:05:14

 
  बहुत ही सुंदर आलेख. थायराइड पर इतना सुंदर विश्लेषण पहली बार देखा ! और मेरा तो मानना है आयोडीन नमक एक बड़ा घोटाला है जो व्यापारिक लाभ के लिए जनता पर जबरदस्ती थोपा गया है , और सेहत को बर्बाद कर रहा है !  
   
 

Rajiv [pikkybabu@gmail.com] Giridih, Jharkhand - 2012-09-25 18:36:53

 
  पूरे लेख में आयोडीन की अधिकता को हायपो थायरोडिज्म कहा गया है, प्रश्न उठता है कि क्या आयोडीन की कमी को क्या हायपर थायरोडिज्म कहेंगे ? कर जी कृपया इसे स्पष्ट करें. 
   
 

योगेंद्र शांडिल्य [yogendrashandilya@gmail.com] बिलासपुर - 2012-09-25 16:09:27

 
  बहुत ही विस्तृत और जागरूक करने वाला लेख है ....कब तक आम हिदुस्तानी एक चूहे या गिन्नी पिग की तरह केवल प्रयोग करने के लिए एक वस्तु बनकर रह जाएगा ...क्या उसे जीने का अधिकार नहीं है ....? 
   
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