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सिमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से बातचीत

हम आह भी भरते हैं तो...

 

सिमी के अध्यक्ष शाहिद बद्र फलाही का आरोप

 

 

राजीव यादव

आजमगढ़ से लौटकर

 

 

स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी की स्थापना 1977 में हुई थी और सरकारी दस्तावेज़ों की मानें तो इसका गठन भारत को एक इस्लामिक देश में बदलने के लिए किया गया था. सरकारी सूत्रों के अनुसार अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सिमी को आतंकवादी गतिविधियों से भी कोई एतराज नहीं है. सिमी पर दुनिया भर के इस्लामिक चरमपंथी संगठनों के साथ-साथ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ भी गहरे संबंध के आरोप लगते रहे हैं.

 

पिछले कुछ सालों से देश में जितनी भी आतंकवादी घटनाएं सामने आई हैं, उन सबमें कहीं ने कहीं प्रतिबंधित संगठन सिमी का नाम जुड़ा रहा है लेकिन सिमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाहिद बद्र फलाही का आरोप है कि उनके संगठन को बेवजह बदनाम किया जा रहा है. उनका दावा है कि आज तक पूरे देश में सिमी कार्यकर्ताओं पर कोई भी आरोप सही नहीं पाया गया है.

 

शहर आजमगढ़ से सटे हुए गाँव ककरहटा पहुँचा तो शाहिद अपने यूनानी दवाखाने में एक पाँच साल के निमोनिया से पीड़ित बच्चे को देख रहे थे.

जब मैंने अपना परिचय दिया तो शाहिद ने कहा– “ भाई, हमारे बारे में तो बहुत लिखा जाता है, इनके बारे में भी तो लिखिए कि इस बीस किलोमीटर के क्षेत्र में कोई सरकारी दवाखाना नहीं है.”

shahid badra falahi, SIMI

सिमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाहिद बद्र फलाही का आरोप है कि मीडिया मुद्दों को गलत तरीके से तुल दे रहा है.


27 सितम्बर 2001 को जब सिमी को प्रतिबन्धित किया गया तो उसी रात शाहिद को गिरफ्तार कर लिया गया था. 7 अप्रैल 2004 को उनके ऊपर लगाए गए आरोपों के सही नहीं पाए जाने पर उन्हें बरी कर दिया गया पर कुछ मुकदमों में वे अभी भी आरोपी हैं. यहां पेश है शाहिद से बातचीत के कुछ अंशः

 

 

आप प्रतिबंधित सिमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं, आज सिमी पर लगातार विभिन्न आतंकी घटनाओं में संलिप्त होने का आरोप लग रहा है ?

 

आरोप लग रहा है न, सरकार साबित करके दिखाए. पूरे देश में तमाम हो हल्ला, मीडिया ट्रायल और न्यायालय के रवैये के बावजूद आज तक सिमी कार्यकर्ताओं पर कोई भी आरोप सही नहीं पाया गया है.


जबकि इसी मुल्क में अपने आप को देश भक्त कहने वाले संघ परिवार के संगठन
और लोग कई न्यायिक फैसलों में सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने व दंगा करवाने के आरोप में सजाएं सुनाए जाने के बावजूद खुलेआम घूमते हैं. हम आह भी कर दें तो हो जाएं बदनाम, वो कत्ल भी कर दें तो चर्चा नहीं होता.

अभी हाल ही में विशेष ट्राइब्यूनल ने सिमी पर तकनीकी कारणों से प्रतिबन्ध हटाया, जिस पर उच्चतम न्यायालय ने तीन हफ्ते के लिए रोक लगाई, इस पर आप क्या सोचते हैं?

इसके पहले जब तीन ट्राइब्यूनल्स ने हमारे खिलाफ फैसला दिया और प्रतिबन्ध को जारी रखा तब हमने ट्राइब्यूनल के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की थी. लेकिन उन पर सालों से कोई सुनवाई नहीं हुई. जबकि गीता मित्तल के सिमी पर से प्रतिबंध हटाने के फैसले पर उच्चतम न्यायालय ने तत्काल सक्रियता दिखाई.

 

जहाँ तक तकनीकी कारणों का संदर्भ है तो फैसले तथ्यों के आधार पर होते हैं पर यहाँ मीडिया और सरकार द्वारा जो 'तकनीकी' कारण बताकर प्रचारित किया गया, वो दरअसल पूर्व सूचना थी कि अब तीन हफ्ते के अंदर पूरे देश भर से सिमी के नाम पर गिरफ्तारियाँ कर इस 'तकनीकी फाल्ट' को दूर किया जाय.

 

कहा जा रहा है कि आप और सफदर नागौरी में 'हार्ड लाइन बनाम साफ्ट लाइन' की बहस थी, जिसके चलते नागौरी ने इंडियन मुजाहिद्दीन (आई एम) बना लिया?

 

सिमी का उद्देश्य मुस्लिम नौजवानों में इस्लामिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना, उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना और राजनीतिक तौर पर जागरूक करना था. ये ऐसे काम हैं, जिसमें कोई हार्ड लाइन या साफ्ट लाइन की बहस ही नहीं हो सकती. जहाँ तक सफदर का सवाल है तो वह हमारे संगठन के राष्ट्रीय महासचिव थे, जिसके ओहदे पर पहुँचने की एक मात्र काबिलियत उनकी अकादमिक योग्यता थी और वे पत्रकार थे.

shahid-badra-falahi-clinic, SIMI

अपने यूनानी दवाखाना में बैठे शाहिद के खिलाफ अब तक कोई जुर्म साबित नहीं हुआ है. हालांकि उनके खिलाफ अभी भी कई मुकदमे चल रहे हैं.

 

ये पूरा प्रचार मीडिया और पुलिस की अपनी कल्पनाओं की उपज है जो अपनी सुविधानुसार कभी भी कोई भी कागजी संगठन बनाते-बिगाड़ते रहते हैं.

 

सिमी पर भड़काऊ पोस्टर छापने मसलन 'वेटिंग फॉर गजनी' या बाबरी मस्जिद तोड़ने वालों से लड़ने, मस्जिद का पुर्ननिर्माण करने संबधी पोस्टर व देश की अखण्डता को तार-तार करने वाले साम्प्रदायिक परचे जारी करने का आरोप है?

जिस वेटिंग फॉर गजनी वाले पोस्टर को बार-बार हमारे सांम्प्रदायिक होने के सबूत के बतौर प्रचारित किया जाता है, उसमें ऐसा कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था. आखिर जिन लोगों ने संविधान के सामने शपथ लेने के बावजूद एक ऐतिहासिक धरोहर को तोड़कर देश की गंगा-जमुनी तहजीब को छिन्न-भिन्न किया, जिसके बाद हुए दंगो में हजारों हिन्दू-मुसलमान मारे गए, उन तत्वों के खिलाफ लड़ने के लिए खुदा से किसी योध्दा को भेजने की कामना करना कहाँ से सांप्रदायिक है?

जहाँ तक बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की बात है तो यह तो देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने भी वादा किया था. एक ऐसे पोस्टर को भी सरकार ने देश विरोधी बता दिया था, जिस पर संयुक्त राष्ट्र संघ के अमरीका के मातहत और दबाव में काम करने का आरोप था. जिस पर सुनवायी करते हुए जज एसएन ढींगरा ने कहा कि ये तो एके 47 से भी ज्यादा खतरनाक है.

 

जहाँ तक परचे का सवाल है तो 1999 में मैने सिमी की पत्रिका 'इस्लामिक मूवमेंट' में अंग्रेजी दैनिक 'एशियन एज' में छपे एक लेख का हिन्दी अनुवाद छापा था. जिसका मेरे ऊपर अभी तक मुकदमा चल रहा है. जबकि 'एशियन एज' के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई.

 

15.09.2008, 23.56 (GMT+05:30) पर प्रकाशि

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

mukesh (mukesh_kumar141@yahoo.com) kuwait

 
 मेरा मानना है कि मुस्लिम चाहे इंडिया का हो या पाक का दुनिया का उनका एक ही सपना होता है दूसरे धर्म को छोटा दिखाना क्योंकि मैं मुस्लिम देश में काम करता हूं तो मुझे मालूम है कि मुसलमान क्या सोचते हैं. याद रखना अगला विश्व युद्ध इस मुसलमानों की खातिर ही होगा. 
   
 

mehediali (mehediali@gmail.com)

 
 सब जानते हैं सिमी पर बैन सिर्फ एक मुस्लिम organisation होने की वजह से लगा. अगर आरोपों की बुनियाद पर सरकार को बैन लगाना होता तो अब तक सनातन प्रभात, RSS, बजरंग दल पर अब तक बैन लग चुका होता. 
   
 

imran allahabad

 
 what pragya thakur is doing was bound to happen one day.it is the resentment of what common people have seen for the blast every time.no doubt,till now,behind every blast a muslim culprit was found and infact this has given a wrong impression for muslim.dear countrymen i am also muslim but believe me all muslims are not culprit, who are involved in this type of terrorism act has their own motive.please do no drag every muslim for this.we must punish and blast those culprits who are cheating innocent muslims by showing that they are jihadies.but the irony is that despite of knowing all these things,educated muslims are also becoming their prey......jai hind 
   
 

SAFIA AKHTAR (safia_8akhtar@yahoo.co.in) BHOPAL MP

 
 सिमी प्रेसिडेंड शाहीद का राजीव यादव के इंटरव्यू में दिए गए जवाब और उस पर हमारे देशभक्तों की प्रतिक्रियाएं पढ़ कर औऱ अभी-अभी (23-10-2008) आईबीएन-7 में हिंदू आतंकवादियों के गद्दार कारनामों का भांडाफोड़ देख कर जेहन में कुछ सवाल उभर रहे हैं. जिनका जवाब कम से कम अब तो हमें मिलना चाहिए-
सही मायनों में कौन है आतंकवादी.कौन हैं देश के गद्दार ? आतंकवादी कौन सा मजहब है, जिनके खुदाओं के हाथ में हथियार हैं ? किसके मानने वाले आज भी त्रिशूल दीक्षा देते फिर रहे हैं ? कौन है आतंकवादी, सिर्फ मुसलमान ? सिर्फ इस्लाम ? आज का भंडाफोड़ देखने के बाद अब हिंदू और हिंदूवादी भी ... ? तो जनाब बचा कौन ? ? सिर्फ भारतीय ? ? ? और उनको क्या कहेंगे जो बेगुनाहों की जिंदगियों से खेल रहे है, आतंक फैला रहे हैं, देश को तोड़ रहे हैं, संविधान की इज्जत नहीं कर रहे हैं ? ? आज तक सिमी के नाम पर पकड़े गए कितने नौजवानों के खिलाफ कोई सबूत लाया गया, कितनों को अदालत ने गुनाहगार साबित किया ?
मुझे तो यही लगता है कि हिंदू कट्टरपंथियों को सत्ता का रंग चढ़ चुका है मगर उनके पास आवाम के पास जाने के लिए कोई मुद्दा नहीं है तो फिर सरकार बनाने के लिए इससे अच्छा क्या हो सकता है कि इस देश की बड़ी आबादी (हिंदूओं) को बेवकूफ बना कर वोट झटक लिए जाएं. बकौल शायर-नाहक हम मजबूरों पर ये तोहमत है मुख्तारी की, चाहते हैं सो आप करे हैं हमको बस बदनाम किया.
हमें ये बात समझने की जरुरत है कि आतंकवाद किसी धर्म का मुद्दा नहीं है. जो लोग भी भारत की गंगा जमुनी संस्कृति को नष्ट कर रहे हैं, उन्हें मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए. हम, हमारी औलादें तभी जिंदा बची रहेंगी, जब हमारा लोकतंत्र बचा रहेगा. हम चाहे जिस भी धर्म के हों, हम एकजुट हो कर इस आतंक का मुकाबला करें, जम्हूरीयत बचाएं, देश बचाएं.
 
   
 

ALMGEER (KAREENA564) TAKEONE

 
 प्रजातंत्र को राजतंत्र में न बदलें. भारत बहुत सारे धर्मों का गुरु है.
सिमी पर आरोप लगाने से पहले तो सबूत रखे जाने चाहिए. इस तरह किसी खास समुदाय को निशाना बनाने से देश भर में डर का माहौल पैदा हो गया है. इस तरह से आरोप लगते रहे और डर का माहौल बनता रहा तो मान कर चलिए कि देश नए आतंक को जन्म देगा और इसके जिम्मेवार सिर्फ हम होंगे.
 
   
 

ALMGEER (KARINA645) TAKE ONE

 
 सरकार को अगर सिमी पर प्रतिबंध लगाना है तो पहले उसे सबूत लाना चाहिए, तब सिमी पर प्रतिबंध लगाया जाए. इस तरह की अफवाहों से संप्रदायों को धक्का लगता है, यह बुरा लगता है. 
   
 

deoki nandan mishra (mishradeoki@indiatimes.com) lucknow

 
 सिमी के शाहिद बद्र फलाही के बयान को सही नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि सिमी पर ही देश में दंगे कराने के आरोप हैं.  
   
 

Ranjeev () Chandigarh

 
 Simi must be banned and all of it's leaders, because these people always talk about "muslim" "islam" and don't feel proud that they r "Indian" after partition 1947 muslims shifted to pakistan r called as "MOHAZIR" till today & not accepted by pakistanis as Muslims, and by the support of terrorist groups what these simi leaderS think that they will accept you today, Even NO ONE of SIMI leader has sympathy or Financial support for them who R Affected & died in BOMB BLASTS.  
   
 

manoj (newsman.manoj@gmail.com) chandigar

 
 लगता है हमें एक और क्रांति की जरुरत है. एक ऐसी क्रांति, जहां हम सब मिल कर रहें, सब आज़ाद हों.  
   
 

devender delhi

 
 सिमी आतंकवादी संगठन है और उस पर प्रतिबंध लगा कर उसे खत्म कर देना चाहिए. नहीं तो यह संगठन एक दिन भारत को खत्म करके पाकिस्तान बना देगा. 
   
 

Ritesh "raj" new delhi

 
 pata nahi ye log kya cahte hai. kudh to sachhe musalman ban na sake.par pure muslman kaum ko badnam karne me koi kasar nahi rakhna cahte.SIMI aaj apne kartutoo ke vajah se badnam ho raha hai.ye batein aap lakh chupana chaho fir bhi nahi chupegi.ek kahavat hai"kuch bhi jayada khatarnack hota hai uska aant hoke rahta hai ,der se hi sahi par such ek na ek din pure dunia ke samne hota hai" agar is dunia me kuch badlav lana hi chahte ho to sabse pahle rah se bhatke in yuvaoon ko sahi rasta dikhaoo.kudh to insaniet ki roti kha nahi sakte kam se kam in masum bachoon ke khane me jahar mat milaoo............ ek na ek din tujhe bhi is dharti se jana hai.kuch achhe karm karke ja ,kam se kam is bahane log tujhe yad rakhegein.us balast me aanath us bachhe se jakar mil tab tujhe pata chalega tu kaya kar raha hai................ 
   
 

hindustani

 
 babari masjid todke koi galti nahi ki gayi galti to arangjaeb ne ki thi jisne ram mandir todke masjid banayi thi aur .aur masjid mein to kai aise saboot paye gaye hai jisse waha par mandir hone ki pushti hui hai.
to aise mein galat kya hua.
SIMI ko ye batein bhulakar sohadra se kam karna chahiye .
mana agar galti hui bhi hai to iska badla bomb blast to nahi hai.kisi ko marne se na to to masjid dobara banegi na hi hindustan tumhare hat mein aayega.
 
   
 

ajey () Keylong , Lahaul, H.P.

 
 simi aur is tarha k tamam sangathan BAN rehne chahiye. sabhi bhgwa sangathan bhi. 
   
 

कौशल किशोर शुक्ला (kaushal.shukla@rediffmail.com) मुजफ्फरपुर

 
 सिमी अध्यक्ष जो कह रहे हैं, वे बिल्कुल वैसी ही चोचलेबाजियां जो हैं, जो किसी भी संगठन के सुप्रीमो की मैनेजिंग वाली अवस्था की होती हैं। सिमी अध्यक्ष का बयान नेताओं के बयान की तरह समझा जाना चाहिए। जो आतंकी घटनाएं हो रही हैं और जो सबूत सामने आ रहे हैं, उससे यह साफ हो चला है कि सिमी इन सबके लिए कहीं न कहीं गुनहगार है। सिमी अध्यक्ष को बोलकर नहीं, अपने संगठन के एक-एक साथी की सूची जारी कर जनता को बताना चाहिए कि उनके चेहरे दागदार नहीं है। भारत की सभ्यता और संस्कृति हमेशा से उदार रही है। इस देश में भगत सिंह और आजाद जैसे लोगों ने सांसें ली हैं तो जयचंद जैसे गद्दारों ने भी पनाह पायी है। सिमी अध्यक्ष किस श्रेणी में आते हैं, उन्हें बताना होगा। 
   
 

Ratan Singh N.Delhi

 
 सिमी मुसलमानों का भला नही, नुकसान ही कर रही है. अब तक दुनिया में भारतीय मुसलमानों को आतंकवादी नही माना जाता लेकिन सिमी की गतिविधियाँ ऐसे ही जारी रही तो भारतीय मुसलमानों को भी पुरे विश्व में पाकिस्तानियों की तरह संदिग्ध मानने लग जायेंगे और ये शान्ति पसंद भारतीय मुसलमानों के लिए नुकसान दायी ही होगा इसकी सारी जिमेदारी सिमी की ही होगी. 
   
 

याज्ञवल्‍क्‍य (yagnyawalky@gmail.com) छत्‍तीसगढ

 
 श्रीमान श्री शाहिद बद्र फलाही का कहना बिलकुल ठीक है यह हिंदुस्‍तान है वे बिलकुल ठीक कहते है अब तक आरोप साबि‍त नहीं हो पाए हमारी भ्रष्‍ट व्‍यवस्‍थाओं और हद दर्जे की लापरवाह व्‍यवस्‍थाओं का शानदार नमूना. क्‍या मजाक है क्‍या इन्‍हे हम देशभक्‍त मानें मुसलमान या हिंदु होना भारतीयता नहीं है इन साहब को यह समझना होगा। मेरे जैसे युवाओं के लिए ऐसे लोग और इनका संगठन भारत के लिए गाली है। समझना मुश्किल है ऐसे लोग जिनका इस देश से कोई वास्‍ता नहीं और मुस्लिम वाद से बढकर कोई सोच नहीं जिनके कारनामों से क्‍या जयपुर क्‍या दिल्‍ली क्‍या मुंबई अहमदाबाद थर्राती है उनके लिए इतनी मगजमारी क्‍यों । वे सज्‍जन जो इनकी बातों को हमें बता रहे है गुजारिश है उन गरीबों के पास जाओ जो बेमौत मारे गए हिंदुस्‍तान की निर्दोष आबादी को विधवाओं की बस्‍ती बनारस बनाने पर आमादा इन लोगों को गददार कहना क्‍या गलत है। 
   
 

Hindustani Hindustan

 
 राष्ट्रीय स्तर के संगठन के अध्यक्ष का दवाखाना कुछ ज्यादा ही दीन हीन अवस्था मे नही है ?? कहीं इसलिए तो नही की किसी को इनकी फ़ंडिंग पर शक ना हो ?? सब जानते हैं कि सिमी की आर्थिक स्थिति क्या है ।
मैं सिमी या संघ की समानता से सहमत हूँ पर साथ ही इस बात का भी ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि संघ के आकाओं की आर्थिक संपन्न्ता उनके रहन सहन मे झलकती है । इससे स्पष्ट होता है कि उनके हाथी के दाँत नही हैं । सिमी के अध्यक्ष का खुद को दरिद्र दिखाना शक पैदा करता है ।
 
   
 

deepak () kanpur

 
 जिन लोगों को यह डर सताता रहता है की सिमी जैसे मुस्लिम संगठन हिंदुस्तान को 'मुस्लिम रास्ट्र' में बदल देना चाहतें हैं वो लोग ये क्यूँ भूल जाते हैं की संघ और उसके अनुषांगिक संगठन भी हमेशा से भारत को 'हिंदू रास्ट्र' बनने की मांग करते रहे हैं. तब उन्हें ऐसे संगठन खतरनाक क्यों नही लगते. संगठन चाहे सिमी हो या संघ लोकतंत्र को खतरा दोनों से है. दोनों ही देश को फासीवाद की ओर ले जाना चाहतें हैं. इसमे सिमी जैसे संगठनों से ज्यादा खतरनाक है क्यों की किसी रास्ट्र में बहुसंख्यक की साम्प्रदायिकता अल्पसंख्यको से ज्यादा खतरनाक हुआ करती है. लोगों को यह सीधी सी बात क्यों समझ में नही आती की यह आम जनता के लिए कोई हिंदू मुस्लिम का मसला नहीं ही यह महज़ चुनावों की तैयारी है. ऐसे धमाकों से न मुस्लिम रास्ट्र बनने जा रहा न ही हिदू रास्ट्र खंडित हो रहा, इससे फायदा होगा तो बस भाजपा और कांग्रेस वालों को. हम क्यों अपनी बरसों पुरानी सोहर्द्य की संस्कृति को इन धमाकों में ख़त्म कराने पर लगें हैं. 
   
 

M. EKHLAQUE (analhaque2002@yahoo.co.in) MUZAFFARPUR

 
 देश में जब भी कोई घटना होती है, हमारे हुक्मरान पाकिस्तान और आईएसआई का नाम लेकर अपनी ड्यूटी पूरी कर लेते हैं. कभी मुकम्मल जांच नहीं होती है.
बांगलादेशी घुसपैठ पर प्रतिबंध की बात होती है, लेकिन नेपाल की सीमा सिल करने की बात नहीं होती है. जबकि नेपाल के रास्ते ही तमाम घटनाएं होती हैं.
मैं पूछना चाहता हूं कि आरएसएस, जो सबसे ज्यादा सांप्रदायिक है, उस पर प्रतिबंध क्यों नहीं ? मैं सिमी अध्यक्ष की बात से सहमत हूं. हुकूमत को साजिश नहीं करनी चाहिए.
मोहम्मद अखलाक
पत्रकार
 
   
 

डॉ.दीप्ति गुप्ता पुणे

 
 देश में जब तब होने वाली आतंकवादी घटनाओं के लिए सिमी या उसके अध्यक्ष को ज़िम्मेदार ठहराना कतई उचित नहीं है। संकुचित सोच वाले, निर्दोषों पे प्रहार करने वाले, स्वार्थी लोग तो कहीं भी, हर कौम में, दुनिया के हर हिस्से में मिलेगें। ख़ासकर ऐसे मौकों पर, मुस्लिमों पर आरोप लगाए जाने पर,मैं जाति और देश की संकीर्ण रेखा से ऊपर उठकर, निष्पक्ष रूप से उदार सोच और उदार दिल वाले मुस्लिमों को कभी नहीं भूलती हूँ, जो सच में आतंकवाद से उतने ही पीड़ित और दुखी हैं, जितने कि हिन्दू । जो हिन्दुओं के त्यौहारों, रीति -रिवाजों को उतने ही प्यार से मनाते हैं, जितने कि हिन्दू भाई। मुसीबत की घड़ी में पूरा साथ निबाहते हैं और इस उदारता के लिए कट्टर मुसलमानों द्वारा फटकारे जाते है, कौम से बेदख़ल किए जाते हैं। सो हमें सिमी या अन्य किसी पर बेबात शक़ करने के बजाय, असली गुनहगारों को खोज निकालने की कोशिश करनी चाहिए, उन्हें पकड़ना चाहिए। ऐसा प्रयास लगातार हो भी रहा है। "गुनहगार आतंकवादियों" को एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि भले ही वे इंसानों को चकमा देकर, अपनी खुराफ़ातों का जश्न मनाते रहें, पर वे ईश्वर और क़ायनात की सज़ा से नहीं बच सकते.........!! 
   
 

हिंमांशु सिन्हा रायपुर

 
 सिमी के अध्यक्ष चाहे जो कहें लेकिन सिमी की जब 1977 में स्थापना हुई थी तभी यह घोषणा की गई थी कि सिमी भारत को इस्लामिक राष्ट्र में बदलेगा. wikipedia में ही सिमी का परिचय देखें- The Students Islamic Movement of India was formed in Aligarh, Uttar Pradesh state, in April 1977. The stated mission of SIMI is the ‘liberation of India’ from western materialistic cultural influence and to convert it into an Islamic society. This organization is believed by many, including the Government of India, to be involved in terrorism.

Fears exist in government circles that SIMI has been penetrated by Al-Qaeda. It is suspected that SIMI is now also operating under the name of Indian Mujahideen, an outfit that has taken responsibility for the 2008 Ahmedabad blasts, Jaipur blasts and 2008 Delhi blasts. Indian Mujahideen has taken responsibility of several terrorist acts in India and communicates with the Indian media under psudonyms Al-Arbi and Al-Hindi
 
   
 

प्रियाभंशु ()

 
 मीडिया के माद्यम से अभी तक आम लोगों जो बताया गया है कम से कम वो सचाई तो नहीं ही है, वरना ऐसा क्यों है कि अभी तक एक भी सिमी कार्यकर्ताओं को इन घटनाओं में कोर्ट सजा नहीं हो सका है,मीडिया में हमें इन रिपोर्टों को भी पढ़ना चाहिए. तभी हम सचाई के करीब पहुँच सकेंगे. 
   
 

राजीव

 
 सिमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से क्या आपको कन्फेशन की उम्मीद थी? सिमी का निर्माण उस सारी कड़वाहट का नतीजा है जो मुस्लिम समाज के अन्दर तक पैठ चुकी है. इसके कारण जो भी हो, नतीजे दुखदायक हिन्दु-मुस्लिम दोनों के लिये दुखदायक हैं. 
   
 

सुरेश चंद्र गुप्ता Delhi

 
 अगर सिमी इन हमलों के लिए जिम्मेदार नहीं है तो फ़िर वह जिम्मेदार होंगे जो इन हमलों में मर गए. सिमी को बदनाम करने के लिए शायद उन्होंने ख़ुद ही बम विस्फोट कर दिए हों और ख़ुद को मार डाला हो.

एक बात आप ने नोटिस की कि इस पूरे इंटरव्यू मैं सिमी अध्यक्ष ने एक बार भी बम धमाकों में मरने वालों और उनके परिवार वालों के लिए सहानुभूति का एक शब्द भी नहीं कहा.

 
   
 

ghannu () india

 
 simi chahe jo kahe, wah abhi tak desh me hi maujood apne un aakaon ke karan fal-fool raha hai, jo desh ko thenge par rakhne ke himayati hain 
   
 

rajkumar (rajsinh@hotmail.com) new york

 
 haan GAZANEE ke poster me kyaa gair kanoonee hai?usake log afsos jata rahe hain.jiskee shuruvat usne 1000 saa pahale kee thee band kyon hai?Kyon band ho gaye mandiron ke tootane aur lutane?haan batata chalun pakistan ke atom bomb vale missile ka nam bhee GAZANEE hai.kaheen ye waiting uskee to naheen. 
   

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